सोमवार, 16 जून 2008
मेरा वक्त खराब है
मैं खराब हूं
क्योंकि मेरा वक्त खराब है
वक्त ने मुझे बर्बाद कर दिया
मैं वक्त को बर्बाद कर रहा हूं
इसलिए जब मैं तुम्हें याद करता हूं
तो घड़ी उतार देता हूं
और वक्त की परवाह नहीं करता
शनिवार, 14 जून 2008
पागल
दीन- दुनिया से बेखबर ये एक अलग दुनिया है
ये ग़म की दुनिया है...ये खुशी की दुनिया है
ये भोले भाले और लाचार लोगों की दुनिया है
ये घर से बेघर हुए लोगों की दुनिया है
ये पल में रुठते और पल में मानते लोगों की दुनिया है
ये बच्चों की दुनिया है ये बूढों की दुनिया है
ये हालात के मारे लोगों की दुनिया है
ये अपनों से हारे लोगों की दुनिया है
कभी दिल झांकता है खुद ही अपने झरोके में
तो खुद ही सोचता है कि आखिर ये कैसी दुनिया है.....?
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