शनिवार, 10 मार्च 2012

सूबे का नया सुल्तान


उत्तर प्रदेश को एक नया सुल्तान मिल गया है ! सूबे की कमान एक नये सुल्तान ने थाम ली है ! छोटे कद का हंसमुख गेरुए रंग का ये सुल्तान बेहद शालीन है ! उत्तर प्रदेश की जनता ने भी इस सुल्तान को बेहद खुशी के साथ अपना लिया है ! लेकिन क्या ये सुल्तान जनता के साथ किये गये वादों को निभा पायेगा ?  क्या ये सुल्तान सूबे में नई जान डाल पायेगा ?  क्या ये सुल्तान उत्तर प्रदेश को एक बार फिर उत्तम प्रदेश बना पायेगा ? सवाल कई हैं राह भी मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं !
मुलायम के सबसे बड़े बेटे अखिलेश यादव को यूपी का मुख्यमंत्री चुन लिया गया है सिंहासन पाने के बाद अखिलेश ने सबसे पहले जनता को भरोसा दिया कि वो घोषणापत्र में किये गये सारे वादों को पूरा करेंगे! जनता को उनकी बातों पर यकीन भी है क्योंकि वो सूबे में उभरती हुई ऐसी शख्सियत हैं जिसने हार और जीत, दोनों से सबक लिया लेकिन शालीनता का दामन नहीं छोड़ा ! यूं तो इस नये सुल्तान का जन्म साल 1973 में हुआ था लेकिन सूबे की सियासत में अखिलेश ने साल 2000 में कदम रखा ! हालंकि इससे पहले अखिलेश धौलपुर के सैनिक स्कूल से शिक्षा पाकर मैसूर से एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल कर चुके थे ! सैफई के रहने वाले अखिलेश शिक्षा की चाह में सिडनी तक पहुंचे और फिर वहां से एनवायनमेंटल साइंस में मास्टर डिग्री हासिल कर वापस सैफई आए और पिता के साथ शुरु कर दिया साइकिल पर सवार होकर सियासत का सफर ! साल 2000 में अखिलेश पहली बार लोकसभा पहुंचे ! ये गौरव उन्हें दूसरी बार 2004 और फिर साल 2009 में कन्नौज से तीसरी बार हासिल हुआ ! बीतते वक्त के साथ अखिलेश अपने पिता से राजनीति की समझ हासिल करते रहे  लेकिन फिरोजाबद में लोकसभा के उपचुनाव में जब कांग्रेस के राज बब्बर के हाथों उनकी पत्नी डिंपल यादव को हार मिली तो इस हार ने अखिलेश को हिला कर रख दिया ! बस अखिलेश की जिंदगी में यही वो मोड़ था जहां से उन्होंने संकल्प के साथ साथ समाजवादी पार्टी की दशा दिशा और चेहरा तक बदल देने का फैसला लिया ! राजनीति की अग्निपरीक्षा में अखिलेश के लिए सबसे बेहतर बात ये रही कि पग पग पर उन्हें अपने पिता का तजुर्बा मिलता रहा ! सूबे में समाजवाद की लहर फिर से कायम करने के लिए अखिलेश ने क्रांति रथ निकाला ! सूबे की सड़कों पर कभी पैदल तो कभी साइकिल की सवारी निकाली और जनमानस में ये संदेश दिया कि समाजवादियों का नया सुल्तान उनके करीब है ! अखिलेश को इस बात का अहसास था कि समाजवादी पार्टी को गुंडों की पार्टी कहा जाता है लिहाजा सबसे पहले उन्होंने इस दाग को मिटाने का काम किया ! मायावती के बेहद करीबी नसीमुद्दीन सिद्दीकी के छोटे भाई समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक बाहुबली को पार्टी में शामिल न करने के फैसले पर उन्हें पार्टी महासचिव आजम खान की नाराजगी झेलनी पड़ी ! चाचा शिवपाल यादव की नाराजगी का भी उन्हें सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने रिश्तों को दरकिनार कर पार्टी की छवि निखारने की अपनी जिद को पूरा किया ! सूबे की जनता पर इस फैसले का बड़ा सकारात्मक असर पड़ा ! जिस तरह वो फैसले लेने में बेहद अडिग रहे उसी तरह से उन्होंने राजनीतिक परिपक्वता का भी परिचय दिया! अमर सिंह ने जब उनपर शब्दों के बाण छोड़े तब भी अखिलेश ने यही कहा कि वो मेरे अंकल हैं और अंकल ही रहेंगे ! राहुल गांधी ने जब एक कागज को सपा का घोषणापत्र बताकर फाड़ा तब भी उन्होंने बेहद समझदारी से राहुल को दोस्ताना अंदाज में सलाह दी ! अखिलेश के इस अंदाज ने सूबे में उनकी समझदारी और शालीनता का संदेश दिया जो कि जनता के दिल में उतर गया ! जो पार्टी साल 2009 में अंग्रेजी और कम्प्यूटर की विरोधी थी उस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में टैबलेट और लेपटॉप बांटने का वादा किया! माया ने सूबे को बांटने का जो कार्ड खेला, समाजवादी पार्टी ने उसका पुरजोर विरोध किया ! कांग्रेस ने आरक्षण का जो दाव चला उसपर समाजवादी पार्टी ने आबादी के हिसाब से आरक्षण की चाल चल दी और जामा मस्जिद के शाही इमाम से पार्टी को वोट करने का ऐलान करवा दिया! ये सारी पहल अखिलेश के ज़रिये हुई ! पढे लिखे अखिलेश पर जनता ने भरोसा किया, उनकी शालीनता और समझदारी को गले से लगाया और वोट देकर समाजवादी पार्टी को सूबे में बना दिया नम्बर वन ! जनता ने अपना किया तो विधायकों ने उन्हें सूबे का मुख्यमंत्री चुन लिया ! यहां तक तो सब कुछ ठीक था लेकिन इसके बाद शुरु होगी अखिलेश की अग्निपरीक्षा और इस अग्निपरीक्षा में अखिलेश के सामने चुनौतियां कम नहीं ! उन्हें सूबे से क्राइम को कम करना है, पार्टी से गुंडा छवि का दाग मिटाना है, पूर्वांचल में जारी दिमागी बुखार का कहर खत्म करना है बुंदेलखंड की बदहाली दूर करनी है युवाओं को रोजगार के अवसर दिलाने हैं सूबे में शिक्षा का स्तर बढाना है कुपोषण को दूर भगाना है, घर घर में दोनों वक्त चूल्हा जलवाना है जाटलैंड में गन्ना किसानों को हक दिलवाना है तो भूमि अधिग्रहण जैसे कानून का मजबूत बनवाना है किसानों को बेहतर सुविधायें दिलवाना है, बिजली पानी और सड़क की दिक्कतों को दूर कराना है, औऱ सबसे अहम सूबे की जनता को ये अहसास कराना है कि उन्होंने समाजवादी पार्टी को चुनकर कोई गलती नहीं की ! अखिलेश को राज्य की जनता के जहन में ये बात दाखिल करानी होगी कि वो उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाकर ही दम लेंगे ! अखिलेश में ये क्षमता है, उनके अंदर सूबे को विकास की डगर पर ले जाने की आग है, जरुरत है तो बस इस आग को धधकते रखने की और इसके लिए अखिलेश को अब से ही तय कर लेनी होगी रणनीति, अब से ही तय कर देनी होगी हर समाजवादी की जिम्मेदारी और वक्त वक्त पर करना होगा हर असाइनमेंट का आंकलन ! साथ ही अखिलेश को ये भी याद रखना होगा कि सूबे की राजनीति में उनका कुनबा भी उनके साथ है और अगर कहीं वो कुनबा कर्मभूमि में पीछे रह जाये तो वो उनके खिलाफ भी सख्त कदम उठा सकें क्योंकि कोई सुल्तान तभी जीत की कमान संभाल पाता है जब वो परिवारवाद से उपर उठकर जनहित, समाजहित और देशहित में सोचता है और अपनी जिम्मेदारी निभाता है ! अखिलेश की किस्मत अपना काम कर चुकी है अब वक्त  है कर्म का !